मंगलवार, 6 जुलाई 2010

इटावा में बारिश में भीग रहा गरीबों का अनाज

भारतीय खाद्य निगम ने एक बार फिर गरीबों के निवाले को सड़ाने की तैयारी कर ली है। बीते चौबीस घंटे से गरीबी की रेखा में जीवन यापन करने वाले गरीबों के वितरण के लिए आया 28 हजार कुंतल गेंहू खुले आसमान में पड़ा हुआ है। रविवार की दोपहर के बाद से लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश से इस गेंहू के सड़ने की पूरी संभावनाएं हैं। बावजूद इसके भारतीय खाद्य निगम ने इस गेंहू को मालगोदान पर न तो ढंकवाने के ही कोई इंतजाम किए और न ही इसे गोदामों में पहुंचाया। मसलन यह गेंहू पूरी तरह से भीग चुका है और जानवर बोरों को फाड़ कर उस गेंहू को अपना निवाला बना रहे हैं। यह उस देश की दास्तां का एक हिस्सा है जहां बुंदेलखंड में भूख से मौतें होतीं हैं। मंहगाई आसमान पर है। बढ़ती मंहगाई का ही परिणाम है कि आज केंद्र सरकार में शामिल दलों के अतिरिक्त समूचा विपक्ष एकजुट होकर देशबंदी का ऐलान कर रहा है। गरीब दो वक्त की रोटी जुटाने में नाकाम रहता है। उसी देश में जिस प्रकार से भारतीय खाद्य निगम की लापरवाही उजागर होती है, वह शर्मसार करती है। अन्न को शास्त्रों में देवता का दर्जा दिया है। वहीं स्थानीय माल गोदाम पर गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल, एपीएल एवं अंत्योदय योजना के कार्ड धारकों को वितरित करने के लिए पंजाब से आया 28 हजार कुंतल गेंहू स्थानीय माल गोदाम पर बारिश के पानी में भीग कर सड़ने को तैयार है। गौरतलब है कि बीते दिनों भी माल गोदाम पर इसी प्रकार से पंजाब से आया 33 हजार कुंतल गेंहू चार दिनों तक मालगोदाम पर खुले आसमां तले डला रहा था और जानवरों का निवाला बनता रहा था। इस खबर को जब डीएलए ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो प्रशासन की नींद टूटी और उसने उस गेंहू को गोदामों तक आनन-फानन में पहुंचाया था। शुक्र यह था कि तब बारिश नहीं हुई थी जबकि इस बार रविवार दोपहर से लगातार रुक-रुक कर बारिश हो रही है और मौसम विभाग भी लगातार बारिश की संभावनाएं जता रहा है।रेलवे को भी देना होगा वारफेसमालगोदाम पर गेंहू के खराब होने की तो संभावनाएं बनीं हुर्इं ही हैं। वहीं खाद्य निगम को अपनी लापरवाही के एवज में रेलवे को भी वारफेस की अदायगी करनी होगी। रेलवे मालगोदाम से गेंहू उतरने के नौ घंटे तक माल न उठाने की स्थिति में रेलवे भारतीय खाद्य निगम से सौ रुपये प्रति वैगन गेंहू के हिसाब से जुर्माना बसूलेगा। अब इस जुर्माना को या तो भारतीय खाद्य निगम अदा करेगा अथवा उसका ठेकेदार।कम से कम ढंक कर ही रखा होतामालगोदाम पर खुले आसमां तले पड़े इस गेंहू को यदि भारतीय खाद्य निगम ने तिरपाल अथवा किसी अन्य वस्तु से ढंक दिया होता तो शायद यह गेंहू यूं खराब नहीं होता। जबकि बीते दिनों भारतीय खाद्य निगम के प्रबंधक जय प्रकाश ने स्वीकार किया था कि हमारे पास गेंहू क ो ढंकने के पर्याप्त इंतजाम हैं तो फिर यह लापरवाही क्यों?समीपवर्ती जनपदों को भी वितरित होना थामालगोदाम पर उतरे इस गेंहू पर न सिर्फ इटावा जनपदवासियों बल्कि मैनपुरी, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज सहित आसपास के जनपदवासियों का भी हक था क्योंकि यहां से यह गेंहूं सार्वजनिक वितरण के लिए इन जनपदों को भी जाना था। अब यह अनाज यदि भारतीय खाद्य निगम उठवा भी लेता है तो इस गेंहू को सड़ने से बचाने के हर प्रयास नाकाफी होंगें।लीवर और आंत हो सकतीं हैं क्षतिग्रस्तमुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी. पी. सिंह बताते हैं कि यदि खराब गेंहू का सेवन किया जाता है तो यह एक तरह से फूड प्वॉइजनिंग का काम करता है। इसके सेवन से पेट की बीमारियां तो होतीं ही हैं बल्कि लीवर व आंतें भी क्षतिग्रस्त हो सकतीं हैं। वह बताते हैं कि गेंहू को गोदामों में रखने से पहले पूरी प्रोसेसिंग अपनानी चाहिए क्योंकि नमी होने के कारण ऐसे गेंहू से गोदाम में रखा और अनाज भी खराब होने की संभावना रहती है।

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