गुरुवार, 16 जुलाई 2009

सच का सामना है या फिर बबाले जान ?

सच का सामना है या फिर बबाले जान ?
क्या स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे रियलिटी शो "सच का सामना" से घरों में विवाद छिड़ेगा?प्रोग्राम में पार्टिसिपेंट से उनकी पास्ट लाइफ के बारे बहुत निजी और कंट्रोवर्सियल सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे एक लेडी से पूछा (१५जुलाइ ०९) अगर आपके हसबैंड को पता न चले तो क्या आप दुसरे मर्द के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहेंगी?लेडी ने जवाब दिया "नहीं" जबकि पालीग्राफ मशीन के सामने लेडी का जवाब "हां" दर्ज है.एक आदमी से सवाल पूछा गया "क्या आपके दिल मैं कभी अपनी साली से जिस्मानी रिश्ते बनाने की ख्वाहिश होती है?उसने जवाब दिया "नहीं" मशीन कहती है "हां". गेम में पार्टिसिपेट करने के बाद घर वापसी में उनके रिश्तों में ज़बरदस्त तल्खी आना स्वाभाविक है और घरों में बवाल शुरू होगा. ऊपर से माडर्न दिखना एक बात है लेकिन निजी ज़िन्दगी में पराये मर्द या लेडीज़ से क्लोज़ रिलेशन बनाने की इजाज़त देना या इसे स्वीकार करना हमारे इंडियन कल्चर में नामुमकिन बात है. यह बात भले ही सच हो कि यह प्रोग्राम देश में आज प्रसारित किया जा रहा हो लेकिन विदेशों में पहले ही इस तरह के प्रोग्राम प्रसारित किये जा चके है,वहाँ पर भले ही इस तरह के प्रोगार्मों ने आम आदमी कि जिन्दगी पर कोई असर ना डाला हो लेकिन हिन्दुतान के लिए यह प्रोग्राम किसी बाबले जान से कम नहीं है.जिस तरह से कानूनी मान्यता पा चुके समलेंगगिगता को देशवाशी पचा नहीं पा रहे है ठीक उसी तरह से स्टार प्लस का यह प्रोग्राम है,जिससे कार्यक्रम में हिस्सा लेनेवाले के परिवार में सवालों को लेकर बबाल मचने की पूरी पूरी संभाबना तो है ही साथ ही हमारी आने वाली नश्लों पर भी गहरा असर पड़ने की पूरी उम्मीद है,ऐसे में इस तरह के प्रोग्राम पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार के साथ साथ सामजिक संगठ्नों को भी उठ खडा होना चाहिए,जिस तरह के सवालात सच का सामना में पूंछे जा रहे है वे जरुर ही भारतीय समाज में एक नया बबाल खडा करेगें

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